Murli Poems in Hindi

आज की मुरली से कविता (Poem made from today's murli of Shiv baba) - Daily updated. Poems from Brahma Kumar Mukesh bhai (Rajasthan, India). If you have a query or for old poems, contact BK Mukeshbkmukesh1973@gmail.com

 

Below is date wise murli poems for past 3 days. For old murlis, to download/print, visit Murli Poems PDF

 Murli poem 01​

* मुरली कविता दिनांक 30-07-2020 *

 

दुख़ तो नहीं दिया किसी को जांच करते जाओ

अपने कर्मों का हिसाब चेक करके सोने जाओ

 

भाई भाई होकर रहने वाले भाग्यशाली कहलाते

खुद को आत्मा समझते हुए ही व्यवहार में आते

 

खुल जाते द्वार स्वर्ग के जब बाप धरा पर आते

हम बच्चों को संगमयुग में बाप पुरुषोत्तम बनाते

 

कलियुगी पुरानी दुनिया से अपना दिल उठाओ

केवल सेवार्थ इस शरीर से अपना पार्ट बजाओ

 

हम हैं एक आत्मा बाप ने कराया सत्य एहसास

बाप को याद करने से होंगे हमारे विकर्म विनाश

 

बाप की श्रीमत पर अपनी चलन सुधारते जाओ

लक्ष्मी को वर सको इस लायक खुद को बनाओ

 

अपने पुराने शरीर का तुम संन्यास करते जाओ

अपनी बुद्धि अब पुरानी दुनिया में नहीं लगाओ

 

मन और मुख से सिर्फ बाबा बाबा कहते जाओ

ज्ञान नेत्रों से केवल आत्मा को ही देखते जाओ

 

नीरस माहौल में तुम खुशी की झलक दिखाओ

सदा खुश रहने के वरदान को उपयोग में लाओ

 

शरीर के हर आकर्षण से खुद को मुक्त बनाओ

यही अभ्यास करते हुए तुम अशरीरी बन जाओ

 

*ॐ शांति *

 

 Murli poem 02

* मुरली कविता दिनांक 28-07-2020 *

 

करो बाप को याद तो सदा संग नजर वो आएगा

तेरे 63 जन्मों का हर विकर्म विनाश हो जाएगा

 

सृष्टिचक्र के अन्दर हम भिन्न भिन्न वर्णों में आते

ज्ञान की यही मूल बात दूरांदेशी बाप हमें सुनाते

 

ज्ञान बरसात में नहाकर तुम पवित्र बन जाओगे

सम्पूर्ण पवित्र बनकर ही देवता तुम कहलाओगे

 

बाप को ही याद करना चाहे आए कितने तूफान

तमोप्रधान से बच्चों तुमको बनना है सतोप्रधान

 

स्वर्गवासी बनने के लिए देहभान को पिघलाओ

पुराने शरीर को छोड़ने का पुरुषार्थ करते जाओ

 

सच्चा ब्राह्मण बनकर तुम ज्ञान की भूं भूं करना

आप समान ब्राह्मण बनाने की तुम सेवा करना

 

हर आत्मा की कमजोरी को तुम परखते जाओ

कमजोरी के कांटे को विशेषता का फूल बनाओ

 

निराशा भरे जीवन में भी आस के दीप जलाओ

दिलशिकस्त आत्मा को तुम शक्तिवान बनाओ

 

नाउम्मीद में जब उम्मीद की किरण जगाओगे

सन्तुष्टमणी परोपकारी का वरदान तभी पाओगे

 

अपनी प्रतिज्ञा को बच्चों कभी ना तुम भुलाना

इसी विधि से बाप की प्रत्यक्षता करके दिखाना

 

*ॐ शांति *

 Murli poem 03

* मुरली कविता दिनांक 25-07-2020 *

 

बन्द हुआ भटकना हमारा ज्ञान की दृष्टि पाकर 

शान्तिधाम सुखधाम में हम रहते मन लगाकर

 

संगमयुग में मीठे बाबा से हम ऐसी श्रीमत पाते

देवी देवता बनकर सारे संसार पर राज्य चलाते

 

भक्ति मार्ग तुम बच्चों को इधर उधर भटकाता

बन्द होता भटकना जब बाप धरती पर आता

 

अनेक मतों की दुनिया बच्चों को दुखी बनाती

एक मत होने पर सारी दुनिया स्वर्ग बन जाती

 

देह अभिमान में आए तो असुर ही कहलाओगे

आत्माभिमानी बनकर ईश्वरीय परिवार पाओगे

 

कर्म करते हुए तुम बाप को याद करते जाओ

बिना बाप की याद के अपना समय ना गंवाओ

 

बेहद के नाटक में तुम बच्चे अपना पार्ट बजाते

एक शरीर को छोड़ते ही तुम दूसरा शरीर पाते

 

विनाश सामने खड़ा है बाप ही आकर बतलाते

अज्ञान नींद में सोए हुए हम बच्चों को जगाते

 

याद की यात्रा में बच्चों को तूफान बहुत आएंगे

तुम्हारा माथा एकदम ही खराब करके जाएंगे

 

याद में रहकर तुम बाप की मदद करते जाओ

याद की यात्रा में माया के विघ्नों से ना घबराओ

 

संगमयुग में बच्चों ईश्वरीय सम्प्रदाय अपनाओ

बाप की याद में रहने का अभ्यास बढ़ाते जाओ

 

दातापन के संस्कार खुद में इमर्ज करते जाओ

त्यागी बनकर सदा के लिए श्रेष्ठ भाग्य बनाओ

 

साक्षीपन की सीट पर बच्चों पूरे सेट हो जाओ

हर्षित होकर नाटक का हर दृश्य देखते जाओ

* ॐ शांति *

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