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ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का परिचय (BKWSU introduction in Hindi)

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ब्रह्माकुमारी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की स्थापना स्वयं निराकार परमात्मा शिव (सभी आत्माओ के पिता) ने अपने माध्यम प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के साकार तन द्वारा सत्य ज्ञान सुनाये पुरानी कलयुगी दुनिया का परिवर्तन एवं नई सतयुगी, सुख की दुनिया की स्थापना हेतु की है। हम एक अंतर्राष्ट्रीय स्थर पर मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी संगठन (NGO) हैं, जो सभी धर्मो और संस्कृतिओ से सम्बंधित मनुष्यो को अंतरात्मा (आत्मा) को पहचानने, अनुभव करने और राजयोग के अभ्यास द्वारा उन्हें अपने जीवन में सकारात्मक और जादुई बदलाव लाने में मदद करते हैं।

✱ हमारी कहानी ✱
ओम मंडली - जैसा कि नाम से ज्ञात है, यह आरम्भ में (कराची, पाकिस्तान में 1936 की बात है) बच्चों, माताओं व कुमारों का छोटा सा एक संगठन था, जिन्होंने कुछ दिव्य अनुभवों के पश्चात् परमात्मा के मार्ग में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने सभी सम्बन्ध - संपर्क द्वारा अत्यधिक कठोर वचन व उपेक्षाओं को सहन किया, मात्रा इसलिए क्योंकि उन्होंने परमात्मा द्वारा दिखाए गये मार्ग पर चल पवित्र जीवन जीने का निश्चय कर लिया था। उनका यह त्याग अमर हो गया, आज उन सभी महान आत्माओं को प्यार व सम्मान से दादी - दादा के रूप में सम्बोधित किया जाता है। भगवान बाप के ऐसे हीरेतुल्य बच्चों की जीवन कहानी जानने के लिए जीवनी शाखा पर जाएँ।

✿ वर्तमान समय ✿
अब परिवर्तन का वह समय हैं जो 5000 वर्ष के कल्प चक्र में एक ही बार आता हैं। जब सारा संसार भ्रष्टाचारी और दुखी हैं, तब परमपिता परमात्मा आता है अपने सभी बच्चों को दुःख से मुक्त करने के लिए। परमात्मा हमारा परमपिता, परमशिक्षक, गुरु, सच्चा मित्र, और अविनाशी माशूक़ भी है। वास्तव में वह सभी मधुर सम्बन्धो का सार है। हमारा परमपिता के साथ अति सुन्दर आत्मिक सम्बन्ध है और इसलिए हम अपने जीवन के कठिन व दुःख के समय उन्हें ही याद करते हैं। जानिए मुरली क्या है और कौन ज्ञान सुनते है।

➥ भगवान आ चुके हैं। इस समय जब मनुष्य अपने को आत्मा भूल गए है, जिसके कारण दुनिया में अधर्म, विकार और अज्ञान हैं , व मनुष्य नैतिक रूप से गिर गए हैं , परमपिता परमात्मा आया है हमें याद दिलाने, पढ़ाने और फिर से उसी दुनिया की स्थापना करने जो ५००० वर्ष पहले इस धरा पर थी जिसे हम आज भी स्वर्ग कहते हैं। वर्तमान समय वही संगमयुग हैं , अर्थात कल्प का वह समय हैं जो कलियुग के अंत व सतयुग के आरंभ में आता हैं।

➥ इस समय ही स्वयं शिव बाबा (भगवान) हमारा शिक्षक बनता हैं। इसलिए यह संस्था ईश्वरीय विश्व विद्यालय नाम से जानी जाती हैं। हम स्टूडेंट्स स्वयं परमपिता परमात्मा के द्वारा ज्ञान व् गुणों को धारण कर रहे हैं। इस विश्वविद्यालय द्वारा हम रचता और रचना के सत्य को जान रहे हैं। आओ और आप भी अपने रूहानी पिता निराकार शिव से जनम जनम की प्राप्तियाँ करो।

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